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लाॅकडाउन में बिहार के लाखों लोग देश के दूसरे हिस्सों में फंसे हुए हैं। उनको लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चल रही है। बिहारी छात्रों और मजदूरों को लेकर सियासत भी खूब हो रही है। दिल्ली से कल बिहारी मजदूरों के लिए एक ट्रेन मुजफ्फरपुर के लिए खुली है। दिल्ली सरकार दावा कर रही थी कि इस ट्रेन का भाड़ा उसकी ओर से दिया गया है लेकिन एक चिट्ठी सामने आने के बाद मामला कुछ और हीं सामने आया है। केजरीवाल सरकार ने दावा किया था कि बिहार के मजदूरों के ट्रेन का किराया उसने दिया है. लेकिन बिहार सरकार को भेजे गये दिल्ली सरकार के पत्र ने झूठ को उजागर कर दिया. उधर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गलत दावे कर अपनी पीठ थपथपा रहे केजरीवाल सरकार की तारीफों के पुल बांध दिये. दरअसल शुक्रवार को दिल्ली से बिहार के लिए पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन खुली. दिल्ली से बिहार के मुजफ्फरपुर रवाना हुई इस ट्रेन में 1200 मजदूर सवार हुए. इस बीच दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने ट्वीट किया “श्रमिकों को लेकर दिल्ली से मुजफ्फरपुर, बिहार के लिए रवाना हुई ट्रेन. ट्रेन में सवार सभी 1200 लोगों का किराया अरविंद केजरीवाल की सरकार देगी.” केजरीवाल सरकार और आम आदमी पार्टी के नेताओं की पोल शुक्रवार की रात होते-होते खुल गयी. दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग की ओर से बिहार सरकार को लिखा गया पत्र सामने आ गया. दिल्ली सरकार ने बिहार सरकार को पत्र लिख कर मजदूरों के ट्रेन किराये के लिए दिये गये पैसे को चुकाने की मांग की है. अंग्रेजी में लिखे गये इस पत्र को बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत को भेजा गया है. बिहार को भेजे गये अपने पत्र में दिल्ली सरकार ने कहा है कि बिहारियों की घर वापसी को लेकर दोनों सरकारों में पहले ही बात हो चुकी थी. बिहार सरकार ने कहा था कि वो मजदूरों की वापसी के बाद उन्हें ही ट्रेन का किराया वापस कर देगी.